Pages

तात्कालिक लेख

Grab the widget  Get Widgets
Showing posts with label हिंदी बनाम अंग्रेजी. Show all posts
Showing posts with label हिंदी बनाम अंग्रेजी. Show all posts

Saturday, March 2, 2013

सेकुलर बनाम राष्ट्र वादी

दोस्तों कुछ दिन पहले दिल्ली में रात के समय मेट्रो में घुमने का अवसर मिला वहां मैंने एक एक सज्जन को देखा ,जो अपने को अंग्रेजो की औलाद घोषित करते हुए भासन दे रहा था की अंग्रेजो ने इस देश को कपडे पहनना सिखाया कोर्ट पेंट दिए ,टाई दी , पेन दिए ,यहाँ के लोग पहले लुंगी पहनते थे सिर पे पगड़ी बाधते थे उन सबको अंग्रेजो ने कैप दिलवाई , कहने का मतलब था की अंग्रेजो ने इस देश को सभ्य बनाया ...............उसके भासन सुनके मुझ से रहा नहीं गया ................


मैंने उसको बोला ......अबे मान लिया अंग्रेजो ने ये सब चीजे सिखाई .......पर तु इसी सिक्के का दुसरे पहलु भी देख अब ....................

१)अंग्रेजो ने हजारो कत्ल खाने खोले ....इस देश में गौ हत्या करवाने के लिए अंग्रेजो ने कत्लखाने खुलवाए .............||

२)शराबखाने खुलवाए .............||

३)नए नए रंडीघर खुलवाए ................(जहाँ जाकर इस देश के सेकड़ो युवा अपनी जवानी बर्बाद कर रहे हैं ...................) ||

४)अंग्रेजो की वजह से हिन्दू और मुसलमानों के बीच पहला दंगा शुरू हुआ .........||

५) अंग्रजो के वजह से हिंदी भाषा इस देश की राष्ट्रभाषा होने का सम्मान नहीं पा रही ............||

६) अंग्रेजो ने आजादी भी (ट्रान्सफर ऑफ़ पॉवर अग्रीमेंट) के तहत दी |

७) अंग्रेजो ने वन्देमातरम की जगह जन गन मन को राष्ट्र गीत करवाया ...........||

८)अंग्रेजो ने इस देश के किसानो को सबसे अधिक हानि पहुचाई ||

९)अंग्रेजो की वजह से लाखो लोग बेरोजगार हो गए ...........भारत देश के अपने छोटे बड़े सारे उद्योग नष्ट हो गए ||
और आज भी विदेशी कंपनिया इस देश में लूट कर रही हैं ............और गरीब तंग आ कर आत्महत्या कर रहे हैं ||

१०) सबसे खतरनाक बात ..........पुलिस का डंडा मारने वाला एक्ट चालू करना ......जो आज तक जारी हैं ........जिसकी वजह से लाला लाजपत राय की दर्दनाक मौत हुई..............|| आदि आदि .............

मेरे पास हजारो बाते हैं ................आओ सेकुलरो और खंग्रेसी कुकुरो ..........खुल कर बहस करो हमसे ............तुम्हारे ही हाथ से ही तुम्हारे गाल में झापड़ नहीं पडवाया तो नाम बदल देना मेरा .........................
सब को खुली चुनौती ...................

Thursday, February 21, 2013

मातृभाषा में जीवन जियें और सृजनशील बनें, आविष्कार करें :

सोचने की शक्ति तथा कल्पना शक्ति दोनों विषय के ज्ञान तथा भाषा पर अधिकार पर आधारित होती हैं; कल्पना शक्ति अनुभवों तथा मातृभाषा अर्थात संवेदनशील भाषा के ज्ञान पर मुख्यतः आधारित होती है, जबकि सोचने की अधिकांश शक्ति विषय ज्ञान तथा शब्द ज्ञान, विशेषकर अवधारणात्मक शब्दों के ज्ञान, पर।
विदेशी शब्दावली जो रोजी-रोटी के लिये सीखी जाती है, बहुत सीमित होती है, वह अतिरिक्त अध्ययन से ही बढ़ सकती है। रोजी रोटी की भाषा का अतिरिक्त अध्ययन कम व्यक्ति करते हैं।
अधिकांश अंग्रेजी जानने वालों की क्रियात्मक शब्द शक्ति लगभग 3000- 4000 शब्दों की होती है। इसलिये उनके सोचने की शक्ति भी कम होती है। समाचार पत्रों या टीवी में अधिकांश विषय मनोरंजन या विज्ञापन से संबंधित रहते हैं जो विचार शक्ति को सीमित करते हैं। जिसकी मातृभाषा और रोजी-रोटी की भाषा अलग अलग हो, साथ ही जो विदेशी भाषा के दबाव के कारण अपने समाज के जमीनी यथार्थ से लगभग कट गया हो, उन खंडित व्यक्तित्वों से मौलिक विचारों तथा आविष्कारों की आशा कम ही करना चाहिये।

मौलिक सोच तथा आविष्करण के लिये विषय ज्ञान के साथ मुख्यतया मातृभाषा या जीवन की‌ भाषा की संवेदनशील शब्दावली का उपयोग अपरिहार्य होता है। क्योंकि कविता के सृजन के समान आविष्कार और मौलिक विचारणा की‌ कार्यप्रणाली तर्कणा शक्ति के परे होती है, तथा वह व्यक्ति की संवेदनात्मक शब्दावली की समृद्धि पर भी निर्भर करती है। मनुष्य की संवेदनात्मक भाषा का अधिकांश निर्माण उसकी मातृभाषा में होता है, तथा शैशव से लेकर युवावस्था तक अधिक होता है।

किन्तु अब तो राष्ट्रीय मस्तिष्क अनुसंधान केन्द्र के वैज्ञानिकों ने २००९ में अनुसंधान करने के बाद इसे सिद्ध कर दिया है। उऩ्होंने छात्रों के समूहों पर यह प्रयोग किये। विद्यार्थियों से उऩ्होंने सस्वर पढ़ने के लिये कहा, एक बार हिन्दी में तथा दूसरी बार अंग्रेज़ी में। इस प्रक्रिया के समय मस्तिष्क का (fMRI) क्रमवीक्षण करते हुए उऩ्होंने देखा कि अंग्रेज़ी पढ़ते समय मस्तिष्क का केवल बायां गोलार्ध ही सक्रिय था, किन्तु हिन्दी पढ़ते समय दोनों, दाहिने तथा बाएं, गोलार्धों में सक्रियता थी। अत: उनका निष्कर्ष है कि हिन्दी पढ़ने से मस्तिष्क अधिक चुस्त तथा दुरुस्त रहता है। इसका एक मह्त्वपूर्ण निष्कर्ष यह भी‌ निकलता है कि हिन्दी, और मेरा मानना है कि मातृभाषा, पढ़ते समय मस्तिष्क का बायां अथात 'तर्कशील गोलार्ध', और दाहिना अर्थात 'कल्पनाशील गोलार्ध' दोनों कार्य करते हैं। जब कि एक विदेशी भाषा में पढ़ने में अधिकांशतया केवल तार्किक कार्य करने वाला बायां गोलार्ध ही कार्य करता है। कविता तथा आविष्कार तर्क से परे मस्तिष्क के दाहिने गोलार्ध से होते हैं।

मातृभाषा हम अपने जन्म से शैशव काल तक अपनी मां तथा अन्य प्रियजनों से सीखते हैं जो बहुत ही प्यार से शब्दों का उच्चारण करते हैं, या कभी कभी मां डाँट फ़टकार भी करती है। इस तरह सीखने से शब्द अपने साथ भावनात्मक ऊर्जा लेकर चलते हैं, शब्द वास्तव में अपने साथ एक संस्कृति लेकर चलते हैं। पूरा मस्तिष्क, विशेषकर दाहिना गोलार्ध, के कार्य करने से वे शब्द और इसलिये वह भाषा अधिक 'संवेदनशील' हो जाती‌ है; जब कि केवल तर्कशील गोलार्ध के कार्य करने से उसका तार्किक उपयोग तो हम कर सकते हैं किन्तु सृजनात्मक उपयोग शायद ही कर पाएं। तब क्या आश्चर्य कि डेढ दोसौ वर्षों से अंग्रेज़ी में पढ़ने के बाद भी हमें विज्ञान में एक ही नोबेल पुर्स्कार मिला है, और आज भी इज़राएल, चीन तथा जापान हमसे विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी‌ में‌ बहुत आगे हैं।

अब तो हमें अपनी शिक्षा अपनी समृद्ध मातृभाषाओं में‌ करना ही चाहिये, आविष्कार के द्वारा विज्ञान तथा प्रौद्योगिली में विश्व की अग्रिम पंक्ति में आना चाहिये, ताकि अग्रणी देश हमारा शोषण न करें, वरन हमारा सम्मान करें।

Monday, February 18, 2013

हिन्दी शब्द की व्युत्पत्ति

हिन्दी संवैधानिक रूप से भारत की प्रथम राजभाषा है और भारत की सबसे अधिक बोली और समझी जानेवाली भाषा है। चीनी के बाद यह विश्व में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा भी है।
हिन्दी और इसकी बोलियाँ उत्तर एवँ मध्य भारत के विविध राज्यों में बोली जाती हैं । भारत और अन्य देशों में में ६० करोड़ से अधिक लोग हिन्दी बोलते, पढ़ते और लिखते हैं। फ़िजी,मॉरिशस,गयाना , सूरीनाम की अधिकतर और नेपाल की कुछ जनता हिन्दी बोलती है।
हिन्दी राष्ट्रभाषा, राजभाषा, सम्पर्क भाषा, जनभाषा के सोपानों को पार कर विश्वभाषा बनने की ओर अग्रसर है। भाषा विकास क्षेत्र से जुड़े वैज्ञानिकों की भविष्यवाणी हिन्दी प्रेमियों के लिए बड़ी सन्तोषजनक है कि आने वाले समय में विश्वस्तर पर अन्तरराष्ट्रीय महत्त्व की जो चन्द भाषाएँ होंगी उनमें हिन्दी भी प्रमुख होगी ।

हिन्दी शब्द की व्युत्पत्ति

हिन्दी शब्द का सम्बन्ध संस्कृत शब्द सिन्धु से माना जाता है। 'सिन्धु' सिन्ध नदी को कहते थे ओर उसी आधार पर उसके आसपास की भूमि को सिन्धु कहने लगे। यह सिन्धु शब्द ईरानी में जाकर ‘हिन्दू’, हिन्दी और फिर ‘हिन्द’ हो गया। बाद में ईरानी धीरे-धीरे भारत के अधिक भागों से परिचित होते गए और इस शब्द के अर्थ में विस्तार होता गया तथा हिन्द शब्द पूरे भारत का वाचक हो गया। इसी में ईरानी का ईक प्रत्यय लगने से (हिन्द ईक) ‘हिन्दीक’ बना जिसका अर्थ है ‘हिन्द का’। यूनानी शब्द ‘इन्दिका’ या अंग्रेजी शब्द ‘इण्डिया’ आदि इस ‘हिन्दीक’ के ही विकसित रूप हैं। हिन्दी भाषा के लिए इस शब्द का प्राचीनतम प्रयोग शरफुद्दीन यज्+दी’ के ‘जफरनामा’(१४२४) में मिलता है।
प्रोफ़ेसर महावीर सरन जैन ने अपने " हिन्दी एवँ उर्दू का अद्वैत " शीर्षक आलेख में हिन्दी की व्युत्पत्ति पर विचार करते हुए कहा है कि ईरान की प्राचीन भाषा अवेस्ता में 'स्' ध्वनि नहीं बोली जाती थी। 'स्' को 'ह्' रूप में बोला जाता था। जैसे संस्कृत के 'असुर' शब्द को वहाँ 'अहुर' कहा जाता था। अफ़ग़ानिस्तान के बाद सिन्धु नदी के इस पार हिन्दुस्तान के पूरे इलाके को प्राचीन फ़ारसी साहित्य में भी 'हिन्द', 'हिन्दुश' के नामों से पुकारा गया है तथा यहाँ की किसी भी वस्तु, भाषा, विचार को 'एडजेक्टिव' के रूप में 'हिन्दीक' कहा गया है जिसका मतलब है 'हिन्द का'। यही 'हिन्दीक' शब्द अरबी से होता हुआ ग्रीक में 'इन्दिके', 'इन्दिका', लैटिन में 'इन्दिया' तथा अंग्रेज़ी में 'इण्डिया' बन गया। अरबी एवँ फ़ारसी साहित्य में हिन्दी में बोली जाने वाली भाषाओं के लिए 'ज़बान-ए-हिन्दी', पद का उपयोग हुआ है। भारत आने के बाद मुसलमानों ने 'ज़बान-ए-हिन्दी', 'हिन्दी जुबान' अथवा 'हिन्दी' का प्रयोग दिल्ली-आगरा के चारों ओर बोली जाने वाली भाषा के अर्थ में किया। भारत के गैर-मुस्लिम लोग तो इस क्षेत्र में बोले जाने वाले भाषा-रूप को 'भाखा' नाम से पुकराते थे, 'हिन्दी' नाम से नहीं।

हिन्दी की विशेषताएँ एवं शक्ति :

हिंदी भाषा के उज्ज्वल स्वरूप का भान कराने के लिए यह आवश्यक है कि उसकी गुणवत्ता, क्षमता, शिल्प-कौशल और सौंदर्य का सही-सही आकलन किया जाए। यदि ऐसा किया जा सके तो सहज ही सब की समझ में यह आ जाएगा कि -

१. संसार की उन्नत भाषाओं में हिंदी सबसे अधिक व्यवस्थित भाषा है,

२. वह सबसे अधिक सरल भाषा है,

३. वह सबसे अधिक लचीली भाषा है,

४, वह एक मात्र ऐसी भाषा है जिसके अधिकतर नियम अपवादविहीन हैं तथा

५. वह सच्चे अर्थों में विश्व भाषा बनने की पूर्ण अधिकारी है।

६. हिन्दी लिखने के लिये प्रयुक्त देवनागरी लिपि अत्यन्त वैज्ञानिक है।

७. हिन्दी को संस्कृत शब्दसंपदा एवं नवीन शब्दरचनासमार्थ्य विरासत में मिली है। वह देशी भाषाओं एवं अपनी बोलियों आदि से शब्द लेने में संकोच नहीं करती। अंग्रेजी के मूल शब्द लगभग १०,००० हैं, जबकि हिन्दी के मूल शब्दों की संख्या ढाई लाख से भी अधिक है।

८. हिन्दी बोलने एवं समझने वाली जनता पचास करोड़ से भी अधिक है।

९. हिन्दी का साहित्य सभी दृष्टियों से समृद्ध है।

१०. हिन्दी आम जनता से जुड़ी भाषा है तथा आम जनता हिन्दी से जुड़ी हुई है। हिन्दी कभी राजाश्रय की मुहताज नहीं रही।

११. भारत के स्वतंत्रता-संग्राम की वाहिका और वर्तमान में देशप्रेम का अमूर्त-वाहन

१२. भारत की सम्पर्क भाषा

१३. भारत की राजभाषा


हिन्दी के विकास की अन्य विशेषताएँ

* हिन्दी पत्रकारिता का आरम्भ भारत के उन क्षेत्रों से हुआ जो हिन्दी-भाषी नहीं थे/हैं (कोलकाता, लाहौर आदि।

* हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने का आन्दोलन अहिन्दी भाषियों ( महात्मा गांधी, दयानन्द सरस्वती आदि) ने आरम्भ किया।

* हिन्दी पत्रकारिता की कहानी भारतीय राष्ट्रीयता की कहानी है।

* हिन्दी के विकास में राजाश्रय का कोई स्थान नहीं है; इसके विपरीत, हिन्दी का सबसे तेज विकास उस दौर में हुआ जब हिन्दी अंग्रेजी-शासन का मुखर विरोध कर रही थी। जब-जब हिन्दी पर दबाव पड़ा, वह अधिक शक्तिशाली होकर उभरी है।

* जब बंगाल, उड़ीसा, गुजरात तथा महाराष्ट्र में उनकी अपनी भाषाएँ राजकाज तथा न्यायालयों की भाषा बन चुकी थी उस समय भी संयुक्त प्रान्त (वर्तमान उत्तर प्रदेश) की भाषा हिन्दुस्तानी थी (और उर्दू को ही हिन्दुस्तानी माना जाता था जो फारसी लिपि में लिखी जाती थी)।

* १९वीं शताब्दी तक उत्तर प्रदेश की राजभाषा के रूप में हिन्दी का कोई स्थान नहीं था। परन्तु २० वीं सदी के मध्यकाल तक वह भारत की राष्ट्रभाषा बन गई।

* हिन्दी के विकास में पहले साधु-संत एवं धार्मिक नेताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा। उसके बाद हिन्दी पत्रकारिता एवं स्वतंत्रता संग्राम से बहुत मदद मिली; फिर बंबइया फिल्मों से सहायता मिली और अब इलेक्ट्रॉनिक मीडिया (टीवी) के कारण हिन्दी समझने-बोलने वालों की संख्या में बहुत अधिक वृद्धि हुई है।

Saturday, February 16, 2013

अँग्रेजी भाषा के बारे में भ्रम ***

आज के मैकाले मानसों द्वारा अँग्रेजी के पक्ष में तर्क और उसकी सच्चाई :

1. अंग्रेजी अंतर्राष्ट्रीय भाषा है:: दुनियामें इस समय 204देश हैं और मात्र 12 देशों मेंअँग्रेजी बोली, पढ़ी और समझी जाती है। संयुक्त राष्ट संघ जो अमेरिका में है वहां की भाषा अंग्रेजी नहीं है, वहां का सारा काम फ्रेंच में होता है। इन अंग्रेजों की जो बाइबिल है वो भी अंग्रेजी में नहीं थी और ईसा
मसीह अंग्रेजी नहीं बोलते थे। ईसा मसीह की भाषा और बाइबिल की भाषा अरमेक थी। अरमेक भाषाकी लिपि जो थी वो हमारे बंगला भाषा से मिलती जुलती थी, समय के कालचक्र में वो भाषा विलुप्त हो गयी। पूरी दुनिया में जनसंख्या के हिसाब से सिर्फ 3% लोग अँग्रेजी बोलते हैं। इस हिसाब से तो अंतर्राष्ट्रीय भाषा चाइनिज हो सकती है क्यूंकी ये दुनिया में सबसे ज्यादा लोगों द्वारा बोली जाती है और दूसरे नंबर पर हिन्दी हो सकती है।

2. अँग्रेजी बहुत समृद्ध भाषा है:: किसी भी भाषा की समृद्धि इस बात से तय होती है की उसमें कितने शब्द हैं और अँग्रेजी में सिर्फ 12,000 मूल शब्द हैं बाकी अँग्रेजी के सारे शब्द चोरी के हैं या तो लैटिन के, या तो फ्रेंचके, या तो ग्रीक के, या तो दक्षिण पूर्व एशिया के कुछ देशों की भाषाओं के हैं। उदाहरण: अँग्रेजी में चाचा, मामा, फूफा, ताऊ सब UNCLE चाची, ताई, मामी, बुआ सब AUNTY क्यूंकी अँग्रेजी भाषा में शब्द ही नहीं है। जबकि गुजराती में अकेले 40,000 मूल शब्द हैं। मराठी में 48000+ मूल शब्द हैं जबकि हिन्दी में 70000+ मूल शब्द हैं। कैसे माना जाए अँग्रेजी बहुत समृद्ध भाषा है ?? अँग्रेजी सबसे लाचार/पंगु/ रद्दी भाषा है क्योंकि इस भाषा के नियम कभी एक से नहीं होते। दुनिया में सबसे अच्छी भाषा वो मानी जाती है जिसके नियम हमेशा एक जैसे हों, जैसे: संस्कृत। अँग्रेजी में आज से 200 साल पहले This की स्पेलिंग Tis होती थी।
अँग्रेजी में 250 साल पहले Nice मतलब बेवकूफ होता था और आज Nice मतलब अच्छा होता है। अँग्रेजी भाषा में Pronunciation कभी एक सा नहीं होता। Today को ऑस्ट्रेलिया में Todie बोला जाता है जबकि ब्रिटेन में Today. अमेरिका और ब्रिटेन में इसी बात का झगड़ा है क्योंकि अमेरीकन अँग्रेजी में Zका ज्यादा प्रयोग करते हैं और ब्रिटिश अँग्रेजी में S का, क्यूंकी कोई नियम ही नहीं है और इसीलिए दोनों ने अपनी अपनी अलग अलग अँग्रेजी मान ली।

3. अँग्रेजी नहीं होगी तो विज्ञान और तकनीक की पढ़ाई नहीं हो सकती:: दुनिया में 2 देश इसका उदाहरण हैं की बिना अँग्रेजी के भी विज्ञान और तकनीक की पढ़ाई होटी है- जापान और फ़्रांस । पूरे जापान में इंजीन्यरिंग, मेडिकल के जीतने भी कॉलेज और विश्वविद्यालय हैं सबमें पढ़ाई"JAPANESE" में होती है, इसी तरह फ़्रांस में बचपन से लेकर उच्चशिक्षा तक सब फ्रेंच में पढ़ाया जाता है।
हमसे छोटे छोटे, हमारे शहरों जितने देशों मेंहर साल नोबल विजेता पैदा होते हैं लेकिन इतने बड़े भारत में नहीं क्यूंकी हम विदेशी भाषा में काम करते हैं और विदेशी भाषा में कोई भी मौलिक काम नहीं किया जा सकता सिर्फ रटा जा सकता है। ये अँग्रेजी का ही परिणाम है की हमारे देश में नोबल पुरस्कार विजेता पैदा नहीं होते हैं क्यूंकी नोबल पुरस्कार के लिए मौलिक काम करना पड़ता है और कोई भी मौलिक काम कभी भी विदेशी भाषा में नहीं किया जा सकता है। नोबल पुरस्कार के लिए P.hd, B.Tech, M.Techकी जरूरत नहीं होती है। उदाहरण: न्यूटन कक्षा 9 में फ़ेल हो गया था, आइंस्टीन कक्षा 10 के आगे पढे ही नही और E=hv बताने वाला मैक्स प्लांक कभी स्कूल गया ही नहीं। ऐसी ही शेक्सपियर, तुलसीदास, महर्षि वेदव्यास आदि केपास कोई डिग्री नहीं थी, इन्होने सिर्फ अपनी मात्र भाषा में काम किया।
जब हम हमारे बच्चों को अँग्रेजी माध्यम से हटकर अपनी मात्र भाषा में पढ़ाना शुरू करेंगे तो इस अंग्रेज़ियत से हमारा रिश्ता टूटेगा।
क्या आप जानते हैं जापान ने इतनी जल्दी इतनी तरक्की कैसे कर ली ? क्यूंकी जापान के लोगों में अपनी मात्र भाषा से जितना प्यार है उतना ही अपने देश से प्यार है। जापान के बच्चों में बचपन से कूट- कूट कर राष्ट्रीयता की भावना भरी जाती है।
* जो लोग अपनी मात्र भाषा से प्यार नहीं करते वो अपने देश से प्यार नहीं करते सिर्फ झूठा दिखावा करते हैं।
* दुनिया भर के वैज्ञानिकों का मानना है की दुनिया में कम्प्युटर के लिए सबसे अच्छी भाषा 'संस्कृत' है। सबसे ज्यादा संस्कृत पर शोध इस समय जर्मनी और अमेरिका चल रही है। नासा ने 'मिशन संस्कृत' शुरू किया है और अमेरिका में बच्चों के पाठ्यक्रम में संस्कृत को शामिल किया गया है। सोचिए अगर अँग्रेजी अच्छी भाषा होती तो ये अँग्रेजी को क्यूँ छोड़ते और हम अंग्रेज़ियत की गुलामी में घुसे हुए है। कोई भी बड़े से बड़ा तीस मारखाँ अँग्रेजी बोलते समय सबसे पहले उसको अपनी मात्र भाषा में सोचता है और फिर उसको दिमाग में Translate करता है फिर दोगुनी मेहनत करके अँग्रेजी बोलता है। हर व्यक्ति अपने जीवन के अत्यंत निजी क्षणों में मात्र भाषा ही बोलता है। जैसे: जब कोई बहुत गुस्सा होता है तो गाली हमेशा मात्र भाषा में ही देता हैं.....;)
॥ मात्रभाषा पर गर्व करो.....अँग्रेजी की गुलामी छोड़ो॥ —
जय माँ भारती
हिन्दी, हिन्दु, हिन्दुस्तान
वैदो की और लोटो
जय महाकाल ।।

हम अपनी “हिंदी” भाषा को उचित स्थान नहीं देते हैं अपितु अंग्रेजी जैसी भाषा का प्रयोग करने में गर्व महसूस करते हैं 2 ?

हम अपनी “हिंदी” भाषा को उचित स्थान
नहीं देते हैं अपितु
अंग्रेजी जैसी भाषा का प्रयोग करने में
गर्व महसूस करते हैं ?
कोरिया का उदहारण ले तो वह
बिना इंग्लिश को अपनाए हुए ही विकसित
हुए हैं और हम समझते हैं की इंग्लिश के
बिना आगे नहीं बढा जा सकता।
हिन्दी प्रेमियों, चीन, रूस, फ्रांस,
इसराइल, जर्मनी, कोरीया जापान और इन
जैसे कई अन्य देशों को देखें जिन्होने
अपनी मातृभाषा के दम पर विकास
किया है| इन देशों के लोग अँग्रेज़ी बोलने मे
शर्म करते हैं और
अपनी मातृभाषा को ज़्यादा महत्व देते हैं|
प्रथम कक्षा से लेकर स्नातक स्तर तक इन
देशों मे शिक्षा का माध्यम
इनकी मातृभाषा ही है, अँग्रेज़ी नही| फिर
भी ये हमसे कहीं आयेज हैं|
*हिन्दी के प्रभाव और क्षमता को अब
विश्व की बड़ी-बड़ी कंपनियां भी सलाम
कर रही है। विश्व में मोबाइल की सबसे
बड़ी कंपनी नोकिया ने हाल ही लन्दन में
अपने तीन नए मॉडल बाजार में उतारे।
आपको ये जानकर खुशी होगी कि इन
तीनो मॉडल्स को कंपनी ने
हिन्दी का नाम दिया है। इन्हें अमेरिका,
यूरोप और एशिया यानी पूरी दुनिया में
आशा-300 और आशा-200 मॉडल के फोन
लांच किए जाएंगे।
*जुरासिक पार्क जैसी अति प्रसिध्द
हॉलीवुड फ़िल्म को भी अधिक मुनाफ़े के
लिए हिंदी में डब
किया जाना जरूरी हो गया । इसके
हिंदी संस्करण ने भारत में इतने पैसे कमाए
जितने अंग्रेजी संस्करण ने पूरे विश्व में
नहीं कमाए थे ।
*अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने 114
मिलियन डॉलर की एक विशेष
राशि अमरीका में हिंदी, चीनी और
अरबी भाषाएं सीखाने के लिए स्वीकृत
की है । इससे स्पष्ट होता है कि हिंदी के
महत्व को विश्व में कितनी गंभीरता से
अनुभव किया जा रहा है ।
*अनेक देश हिंदी कार्यक्रम प्रसारित कर
रहे हैं, जिनमें बीबीसी, यूएई क़े 'हम एफ-
एम' ,जर्मनी के डॉयचे वेले, जापान के
एनएचके वर्ल्ड और चीन के
चाइना रेडियो इंटरनेशनल
की हिंदी सेवा विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।
*हॉलीवुड ने पहचानी हिन्दी की ताकत –
बहुचर्चित मशहूर ओर
कामयाबी का नया इतिहास रचने
वाली चलचित्र ( फ़िल्म) को दिया वैश्विक
हिन्दी नाम 'अवतार' । अवतार शब्द
का अर्थ यह है कि पृथ्वी में आना।हॉलीवुड
की मशहूर फ़िल्म "अवतार"
दुनिया की सबसे ज़्यादा कमाई करने
वाली चलचित्र ( फ़िल्म) बन गई है ।
हिन्दी के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए अब
ट्विटर हिन्दी में ::-----:----:हि न्दी के
बढ़ते प्रभाव को देखते हुए अब ट्विटर
हिन्दी में भी अपनी सेवा शुरू करने
जा रही है ।ट्विटर बहुत ही तेजी से
इंटरनेट पर लोकप्रिय
हो रही माइक्रोब्लॉगिंग नेटवर्किंग
सेवा है। सामाजिक मेलजोल की लोकप्रिय
साइट ‘ट्विटर’ के भारतीय प्रशंसकों के
लिए एक खुशखबरी। ट्विटर ने 14 सितम्बर
२०११ हिन्दी दिवस के अवसर
अपना हिन्दी वर्जन पेश किया।
जब आठवां विश्व हिन्दी सम्मेलन हिंदी में
बोले संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की-
मून:-----:-- -आठवां विश्व हिन्दी सम्मेलन,
अमरीका के न्यूयार्क शहर में 13-15
जुलाई, 2007 को आयोजित किया गया।
सम्मेलन का मुख्य विषय " विश्व मंच पर
हिन्दी " था। सम्मेलन का उद्घाटन
समारोह संयुक्त राष्ट्र संघ के मुख्यालय में
संपन्न हुआ। विश्व के समस्त
हिंदी प्रेमियों और कर्मियों के लिए संयुक्त
राष्ट्र संघ के सभा कक्ष में पहली बार आठवें
विश्व हिंदी सम्मेलन का शुभारंभ होना एक
ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है ।
क्या हमें अँग्रेजी की गुलामी छोडकर
हिन्दी को महत्व
नहीं देना चाहिए ?"भारत की सिर्फ़ सात
प्रतिशत जनसंख्या अँग्रेजी बोलती है
हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्तान
हमारा"
!!जागो भारतीय जागो !!
सबसे स्वतंत्र रस जो भी अनघ पियेगा
पूरा जीवन केवल वह वीर जियेगा!
"डूबती कश्ती को अब
किनारा देना होगा ,
लडखडाते देश को हमें सहारा देना होगा,
लिखना है इतिहास हमे अपने हिन्द का,
फिर इस काम में लहू हमें
हमारा देना होगा !"
जय हिन्द जय भारत जय हिंदुत्व जय
महाकाल

हम अपनी “हिंदी” भाषा को उचित स्थान नहीं देते हैं अपितु अंग्रेजी जैसी भाषा का प्रयोग करने में गर्व महसूस करते हैं ?

कोरिया का उदहारण ले तो वह बिना इंग्लिश को अपनाए हुए ही विकसित हुए हैं और हम समझते हैं की इंग्लिश के बिना आगे नहीं बढा जा सकता।

हिन्दी प्रेमियों, चीन, रूस, फ्रांस, इसराइल, जर्मनी, कोरीया जापान और इन जैसे कई अन्य देशों को देखें जिन्होने अपनी मातृभाषा के दम पर विकास किया है| इन देशों के लोग अँग्रेज़ी बोलने मे शर्म करते हैं और अपनी मातृभाषा को ज़्यादा महत्व देते हैं| प्रथम कक्षा से लेकर स्नातक स्तर तक इन देशों मे शिक्षा का माध्यम इनकी मातृभाषा ही है, अँग्रेज़ी नही| फिर भी ये हमसे कहीं आयेज हैं|

*हिन्दी के प्रभाव और क्षमता को अब विश्व की बड़ी-बड़ी कंपनियां भी सलाम कर रही है। विश्व में मोबाइल की सबसे बड़ी कंपनी नोकिया ने हाल ही लन्दन में अपने तीन नए मॉडल बाजार में उतारे। आपको ये जानकर खुशी होगी कि इन तीनो मॉडल्स को कंपनी ने हिन्दी का नाम दिया है। इन्हें अमेरिका, यूरोप और एशिया यानी पूरी दुनिया में आशा-300 और आशा-200 मॉडल के फोन लांच किए जाएंगे।

*जुरासिक पार्क जैसी अति प्रसिध्द हॉलीवुड फ़िल्म को भी अधिक मुनाफ़े के लिए हिंदी में डब किया जाना जरूरी हो गया । इसके हिंदी संस्करण ने भारत में इतने पैसे कमाए जितने अंग्रेजी संस्करण ने पूरे विश्व में नहीं कमाए थे ।

*अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने 114 मिलियन डॉलर की एक विशेष राशि अमरीका में हिंदी, चीनी और अरबी भाषाएं सीखाने के लिए स्वीकृत की है । इससे स्पष्ट होता है कि हिंदी के महत्व को विश्व में कितनी गंभीरता से अनुभव किया जा रहा है ।
*अनेक देश हिंदी कार्यक्रम प्रसारित कर रहे हैं, जिनमें बीबीसी, यूएई क़े 'हम एफ-एम' ,जर्मनी के डॉयचे वेले, जापान के एनएचके वर्ल्ड और चीन के चाइना रेडियो इंटरनेशनल की हिंदी सेवा विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।

*हॉलीवुड ने पहचानी हिन्दी की ताकत – बहुचर्चित मशहूर ओर कामयाबी का नया इतिहास रचने वाली चलचित्र ( फ़िल्म) को दिया वैश्विक हिन्दी नाम 'अवतार' । अवतार शब्द का अर्थ यह है कि पृथ्वी में आना।हॉलीवुड की मशहूर फ़िल्म "अवतार" दुनिया की सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली चलचित्र ( फ़िल्म) बन गई है ।

हिन्दी के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए अब ट्विटर हिन्दी में ::-----:----:हिन्दी के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए अब ट्विटर हिन्दी में भी अपनी सेवा शुरू करने जा रही है ।ट्विटर बहुत ही तेजी से इंटरनेट पर लोकप्रिय हो रही माइक्रोब्लॉगिंग नेटवर्किंग सेवा है। सामाजिक मेलजोल की लोकप्रिय साइट ‘ट्विटर’ के भारतीय प्रशंसकों के लिए एक खुशखबरी। ट्विटर ने 14 सितम्बर २०११ हिन्दी दिवस के अवसर अपना हिन्दी वर्जन पेश किया।

जब आठवां विश्व हिन्दी सम्मेलन हिंदी में बोले संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की-मून:-----:---आठवां विश्व हिन्दी सम्मेलन, अमरीका के न्यूयार्क शहर में 13-15 जुलाई, 2007 को आयोजित किया गया। सम्मेलन का मुख्य विषय " विश्व मंच पर हिन्दी " था। सम्मेलन का उद्घाटन समारोह संयुक्त राष्ट्र संघ के मुख्यालय में संपन्न हुआ। विश्व के समस्त हिंदी प्रेमियों और कर्मियों के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ के सभा कक्ष में पहली बार आठवें विश्व हिंदी सम्मेलन का शुभारंभ होना एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है ।

क्या हमें अँग्रेजी की गुलामी छोडकर हिन्दी को महत्व नहीं देना चाहिए ?"भारत की सिर्फ़ सात प्रतिशत जनसंख्या अँग्रेजी बोलती है
हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्तान हमारा"

!!जागो भारतीय जागो !!





सबसे स्वतंत्र रस जो भी अनघ पियेगा
पूरा जीवन केवल वह वीर जियेगा!

"डूबती कश्ती को अब किनारा देना होगा ,
लडखडाते देश को हमें सहारा देना होगा,
लिखना है इतिहास हमे अपने हिन्द का,
फिर इस काम में लहू हमें हमारा देना होगा !"

जय हिन्द जय भारत जय हिंदुत्व जय महाकाल

Wednesday, February 13, 2013

अंग्रजी भाषा की डिक्शनरी मेँ मात्र चार लाख शब्द हैँ........!!

मित्रोँ, हमारे देश मेँ एक सबसे बड़ा झूठ प्रचारित किया जाता है कि अंग्रेजी के बिना कुछ नहीँ हो सकता क्योँकि यह पूरे विश्व की भाषा है और सबसे समृद्ध है। आइये आपको अंग्रेजी की सच्चाई बताते हैँ-
1. भारत अकेला ऐँसा देश है जहाँ विदेशी भाषा अंग्रजी मेँ शिक्षा दी जाती है।
बाकि सभी देश अपनी मातृ भाषा मेँ ही अपनी शिक्षा ग्रहण करते है।
2. पूरे विश्व मेँ सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा चीनी है फिर इसके बाद हिन्दी और तीसरे स्थान पर रुसी भाषा है। अंगेजी का बारहवाँ स्थान है। तो फिर अंग्रेजी पूरे विश्व की भाषा कहाँ से हो गयी?
3. हमारा देश ही एकमात्र अकेला ऐँसा देश है जहाँ विदेशी भाषा मेँ समाचार पत्र
छपते हैँ। बाकि किसी भी दूसरे देश मेँ विदेशी भाषा मेँ अखबार नहीँछपते
हैँ। और अगर छपते भी हैँ तो बहुत कम मात्रा मेँ।
4. अंग्रजी भाषा की डिक्शनरी मेँ मात्र चार लाख शब्द हैँ और अंग्रेजी के मूल शब्द सिर्फ 65 हजार हैँ बाकि दूसरे भाषाओँ से चोरी किये हुये शब्द हैँ। इसके विपरीतहिन्दी मेँ 70 लाख तथा संस्कृत मेँ 100 अरब से भी अधिक शब्द हैँ और जिस भाषा का शब्दकोष जितना अधिक होता है वह भाषा उतनी ही अधिक समृद्ध होती है अर्थात अंग्रेजी का व्याकरण सबसे खराब है।
5. दुनिया का कोई भी धर्मशास्त्र और अन्य पुस्तकेँ कभी अंग्रेजी मेँ नही लिखी गयी। इसके अलावा कोई भी दर्शनशास्त्री, धर्मशास्त्री आजतक अंग्रेजी भाषा बोलने वाला नहीँ हुआ। रुसो, प्लूटो, अरस्तू इत्यादि इनका अंग्रेजी भाषा से
कोई लेना-देना नहीँ था। यहाँ तक की ईसा मसीह की अपनी भाषा कभी भी अंग्रेजी नहीँ रही। ईसा मसीह ने जो उपदेश दिये थे वो भी अंग्रेजी भाषा मेँ
कभी नहीँ दिये। बल्कि ईसा मसीह ने अरमेक भाषा में अपने उपदेश दिए थे। और बाइबिल भी अंग्रेजी भाषा मेँ नहीँ लिखी गयी थी। बल्कि अरमेक
भाषा में लिखी गयी थी। अरमेक भाषा की लिपि बिल्कुल बांग्ला भाषा की लिपि के तरह थी।
6. सयुक्त राष्ट्र महासंघ और नासा की रिपोर्ट के अनुसार संस्कृत भाषा कम्प्यूटर के लिये सबसे उत्तम् है क्योँकि इसका व्याकरण शत् प्रतिशत शुद्ध है। इसके अलावा अंग्रेजों ने दुनिया में सबसे कम वैज्ञानिक शोध कार्य किये। तो मित्रोँ ये कहानी है अंग्रजी भाषा की और हमारे देश मेँ बच्चोँ के ऊपर जबरदस्ती अंग्रेजी थोप दी जाती है। तथा बच्चा बेचारा सारी उम्र अंग्रेजी का मारा फिरता रहता है। और उसके सिर्फ अंग्रेजी सीखने के चक्कर मेँ दूसरे महत्वपूर्ण विषय छूट जाते हैँ। इसके अलावा जब सेना केऑफिसर की भर्ती होती है तो वहाँ भी अंग्रेजी आना जरुरी होता है। अब अंग्रेजी का फौज से क्यालेना देना। विश्व
के ताकतवर देश चीन जापान जर्मनी फ्राँस इत्यादि देश के सैनिक तो अंग्रेजी जानते भी नहीँ हैँ। तो मित्रोँ हमको इस अंग्रेजियत की गुलामी से बाहर निकलना होगा। क्योँकि किसी भी राष्ट्र का सम्पूर्ण विकास सिर्फ उनकी मातृभाषा और राष्ट्रभाषा मेँ हो सकता है।

वन्दे मातरम् ।।जय
हिन्द । जय भारत।।जय
मातृभूमि